संत सेना महाराज निर्याण (श्रावण वद्य १२)
स्वहिता कारणें सांगतसे तुज | अंतरीचें गुज होतें कांही ||१||
करा हरिभजन तराल भवसागर | उतरील पैलपार पांडुरंग ||धृ||
कृपा नारायणें केली मजवरी | तुम्हा लागी हरी विसंबेना ||३||
सेना सांगूनियां जातो वैकुंठासी | तिथी द्वादशी श्रावणमास ||४||
sant sena maharaj niryan abhang swahita karane sangatase tuj antariche guj hote kahi
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