आवाहन

Monday, April 28, 2014

संत सेना महाराज निर्याण (श्रावण वद्य १२)

संत सेना महाराज निर्याण (श्रावण वद्य १२)

माझें झालें स्वहित | तुम्हां सांगतों निश्चित ||१||
करा हरीचें चिंतन | गावे उत्तम हे गुण ||धृ||
श्रावण वद्य द्वादशी | सेना समाप्त त्यादिवशी ||३||

sant sena maharaj  niryan samadi vaikunth gaman maze majhe zale swahit tumha sangato nishchit

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