श्री ज्ञानेश्वर महाराज कृत हरिपाठ
अभंग क्र.८
संतांचे संगती मनोमार्ग गती | आकळावा श्रीपती येणें पंथे ||१||
राम कृष्ण वाचा भाव हा जीवाचा | आत्मा जो शिवाचा रामजप ||२||
एक तत्व नाम साधिती साधन | द्वैताचे बंधन न बाधिजे ||३||
नामामृत गोडी वैष्णवा लाधली | योगिया साधली जिवनकळा ||४||
सत्वर उच्चार प्रल्हादी बिंबला | उध्दवा लाधला कृष्ण दाता ||५||
ज्ञानदेव म्हणे नाम हे सुलभ| सर्वत्र दुर्लभ विरळा जाणे ||६||
हरि मुखें म्हणां हरि मुखें म्हणां | पुण्याची गणना कोण करी ||धृ||
santanche sangati manomarg gati aakalava shipati yene panthe
हरि मुखें म्हणां हरि मुखें म्हणां | पुण्याची गणना कोण करी ||धृ||
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