आवाहन

Tuesday, April 8, 2014



श्री ज्ञानेश्वर महाराज कृत हरिपाठ



अभंग क्र.९



विष्णुवीण जप व्यर्थ त्याचे ज्ञान | राम कृष्णीं मन नाही ज्याचे ||१||

उपजोनी करंटा नेणे अद्वैत वाटा | रामकृष्णी पैठा कैसा होय ||२|| 

द्वैताची झाडणी गुरूवीण ज्ञान | तया कैसे किर्तन घडेल नामीं ||३|| 

ज्ञानदेव म्हणे सगुण हे ध्यान| नाम पाठ मौन प्रपंचाचे ||४||

हरि मुखें म्हणां हरि मुखें म्हणां | पुण्याची गणना कोण करी ||धृ||

vishnuvin jp japa jap vyarth tyache dnyan ram krushni man nahi jyache haripath

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